जेवर एयरपोर्ट के आसपास बन रही “एयरपोर्ट सिटी” : होटल, बिजनेस पार्क और ट्रांसपोर्ट हब से बदलने जा रही है पूरी तस्वीर।
उत्तर भारत की नई आर्थिक राजधानी बनने की ओर बढ़ता यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र।
मुकेश कुमार मासूम की विशेष रिपोर्ट
Noida International Airport के आसपास विकसित की जा रही “Aerotropolis” यानी “Airport City” परियोजना अब केवल सरकारी घोषणा या भविष्य की कल्पना भर नहीं रह गई है, बल्कि जमीन पर इसका स्वरूप तेजी से दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश सरकार, Yamuna Expressway Industrial Development Authority (YEIDA), केंद्र सरकार और निजी निवेशक मिलकर जेवर क्षेत्र को उत्तर भारत के सबसे बड़े एविएशन-इंडस्ट्रियल-कॉमर्शियल कॉरिडोर में बदलने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट के आसपास होटल, बिजनेस पार्क, कन्वेंशन सेंटर, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, मेट्रो नेटवर्क और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का विशाल ढाँचा विकसित होगा, जिससे पूरा यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र दिल्ली-NCR की नई आर्थिक राजधानी के रूप में उभर सकता है।
होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर : एयरपोर्ट के साथ बढ़ेगी वैश्विक मेहमाननवाज़ी
YEIDA ने सेक्टर-28 और सेक्टर-29 में होटल प्लॉट योजनाएँ लॉन्च कर दी हैं। इससे यह स्पष्ट हो चुका है कि एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर विकसित करने की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार, कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय होटल समूह एयरपोर्ट क्षेत्र में निवेश को लेकर रुचि दिखा रहे हैं। इनमें बिजनेस होटल, एयरपोर्ट ट्रांजिट होटल, लग्ज़री कन्वेंशन होटल और सर्विस अपार्टमेंट मॉडल प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी, वैसे-वैसे कॉर्पोरेट यात्रियों, विदेशी निवेशकों और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिसके कारण होटल उद्योग में भारी निवेश आएगा।
अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण के कई होटल 2027-28 तक आंशिक रूप से संचालन में आ सकते हैं। अभी भूमि आवंटन, DPR और निवेश समझौते की प्रक्रियाएँ चल रही हैं।
बिजनेस पार्क : डेटा सेंटर, कॉर्पोरेट ऑफिस और हाई-टेक इंडस्ट्री का नया केंद्र :
एयरपोर्ट सिटी की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी “Business & Commercial District” को माना जा रहा है। यह मुख्य रूप से सेक्टर-24, 24A, 28, 29 और 33 के आसपास विकसित किया जा रहा है।
यहीं भविष्य के कॉर्पोरेट ऑफिस, लॉजिस्टिक्स पार्क, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित होंगी।
YEIDA अधिकारियों के अनुसार, अब तक 3,000 से अधिक औद्योगिक और कमर्शियल प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। लगभग 340 यूनिट्स निर्माणाधीन हैं जबकि अनेक इकाइयाँ उत्पादन भी शुरू कर चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट और उससे जुड़ी आधारभूत परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये की विकास योजना तैयार की है। सिंगापुर और अन्य देशों के निवेशकों के साथ हुए समझौतों ने भी इस क्षेत्र को नई गति दी है।
कौन-कौन से बड़े विकास प्रस्ताव चल रहे हैं?
- इंटरनेशनल फिल्म सिटी :
सेक्टर-21 में प्रस्तावित फिल्म सिटी परियोजना को भारत की सबसे आधुनिक मीडिया और मनोरंजन नगरी के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें फिल्म स्टूडियो, OTT प्रोडक्शन यूनिट, थीम पार्क, फिल्म इंस्टीट्यूट और पर्यटन सुविधाएँ शामिल होंगी।
- मेडिकल डिवाइस पार्क :
सेक्टर-28 में विकसित हो रहा मेडिकल डिवाइस पार्क देश में मेडिकल उपकरण निर्माण का बड़ा केंद्र बन सकता है। सरकार का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और स्थानीय उत्पादन बढ़ाना है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब :
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और सेमीकंडक्टर उद्योग का नया केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है। कई कंपनियाँ निवेश प्रस्ताव दे चुकी हैं।
- लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग कॉरिडोर :
एयरपोर्ट के पास विशाल कार्गो और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिससे दिल्ली-NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा।
- डेटा सेंटर पार्क :
जेवर क्षेत्र में हाइपर-स्केल डेटा सेंटर विकसित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI आधारित सेवाओं के विस्तार के कारण यह क्षेत्र टेक्नोलॉजी निवेश का बड़ा केंद्र बन सकता है।
मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब : सड़क, रेल, मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी का संगम :
जेवर एयरपोर्ट को केवल हवाई अड्डा नहीं बल्कि मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का केंद्र बनाया जा रहा है।
Ghaziabad-Jewar RRTS कॉरिडोर, Aqua Line Metro Extension, Delhi-Mumbai Expressway लिंक, ई-बस नेटवर्क और हाइड्रोजन-फ्यूल ट्रांसपोर्ट मॉडल जैसी परियोजनाएँ इस क्षेत्र को भविष्य का “स्मार्ट मोबिलिटी ज़ोन” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यही कनेक्टिविटी इस क्षेत्र को गुरुग्राम और दिल्ली एरोसिटी जैसी व्यावसायिक सफलता दिला सकती है।
जमीन अधिग्रहण और बढ़ती निवेश गतिविधियाँ :
एयरपोर्ट विस्तार और नई परियोजनाओं के लिए हजारों एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। सरकार लगातार नई आवासीय, होटल और औद्योगिक योजनाएँ लॉन्च कर रही है।
रियल एस्टेट बाजार में भी तेज़ी देखने को मिल रही है। निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में जमीन और प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
क्यों कहलाते हैं धीरेन्द्र सिंह “विकास पुरुष”?
Jewar क्षेत्र और Noida International Airport परियोजना की चर्चा जब भी होती है, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के साथ – साथ स्थानीय विधायक धीरेन्द्र सिँह का नाम प्रमुखता से सामने आता है।
स्थानीय स्तर पर धीरेन्द्र सिँह “विकास पुरुष” कहे जाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं।
एयरपोर्ट परियोजना को जमीन पर उतारने में सक्रिय भूमिका :
जब जेवर एयरपोर्ट परियोजना प्रारंभिक चरण में थी, उस समय भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा था। क्षेत्र के किसानों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित कराने में धीरेन्द्र सिंह की सक्रिय भूमिका को स्थानीय लोग महत्वपूर्ण मानते हैं।
उन्होंने लगातार यह तर्क रखा कि एयरपोर्ट केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक दिशा बदलने वाला कदम है।उनकी बात किसानों ने मानी। हर किसी के वश में यह नहीं था। यह सिर्फ धीरेन्द्र सिँह ही कर सकते थे।
निवेश और उद्योग के लिए माहौल तैयार करना :
धीरेन्द्र सिंह लगातार निवेशकों, उद्योगपतियों और सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकों में शामिल होते रहे हैं। उनका दावा रहा है कि एयरपोर्ट के कारण लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा और पलायन कम होगा।
उन्होंने मेडिकल डिवाइस पार्क, फिल्म सिटी, डेटा सेंटर और औद्योगिक क्लस्टर जैसी परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की मांग कई मंचों पर उठाई।
कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास पर फोकस :
Jewar क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण, बिजली, जलापूर्ति, शिक्षा संस्थानों और ग्रामीण कनेक्टिविटी को लेकर भी उन्होंने लगातार सक्रियता दिखाई है।
हवाई यात्रा के किराये कम करवाना, प्रस्तावित टोल वृद्धि को रुकवा देना यह उनकी अलावा किसी के बूते की बात नहीं है।
उनकी मन में जनता के लिये अथाह लगाव और प्यार है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एयरपोर्ट परियोजना के कारण जिस प्रकार जेवर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है, उसमें धीरेन्द्र सिंह की आक्रामक पैरवी और राजनीतिक सक्रियता का बड़ा योगदान माना जाता है।
किसानों और युवाओं के बीच लोकप्रियता :
एयरपोर्ट परियोजना के दौरान किसानों को मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से प्रशासन से वार्ता की। यही कारण है कि समर्थक उन्हें “विकास पुरुष” की संज्ञा देते हैं।
विपक्ष के आरोप :
कुछ लोग ये भी आरोप लगाते रहते हैँ कि जेवर एयरपोर्ट के आस पास के गाँव व शहरों जेवर से हामिदपुर की सड़क अभी तक दुरुस्त नहीं हो पायी है।
इसी प्रकार भूमि अधिग्रहण के समय जिन परिवारों के बच्चों को नौकरी देने का वायदा किया गया था, अभी तक प्राधिकरण ने उस वायदे को पूरा नहीं किया है और उन युवाओं को बार बार आंदोलन करने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है।इसी प्रकार कुछ लोग क्षेत्र के युवाओं को यहाँ बन रही औद्योगिक इकाईयों में प्रमुखता और प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दिलाने का मुद्दा उठा रहे हैँ।
बहुत लोग आशान्वित हैँ कि जब इतने बड़े पैमाने पर विकास किया गया है तो इन मुद्दों को भी स्थानीय विधायक सुलझा ही लेंगे।
भविष्य की तस्वीर :
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि प्रस्तावित परियोजनाएँ तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले पाँच से सात वर्षों में जेवर क्षेत्र केवल एक एयरपोर्ट सिटी नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तर भारत का सबसे बड़ा एविएशन, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और औद्योगिक महानगर बन सकता है।
दिल्ली-NCR का आर्थिक दबाव कम करने और उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में भी यह क्षेत्र निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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